श्रीकृष्ण के आदेश पर अर्जुन ने यहां स्थापित किया था शिवलिंग! सावन में उमड़ते हैं हजारों भक्त
झांसी में एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर है, जहां अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर शिवलिंग स्थापित किया था. यह मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. सावन माह में यहां आस्था का सैलाब उमड़ता है, जब दूर-दराज से श्रद्धालु महादेव का जलाभिषेक करने आते हैं.
बुंदेलखंड की धरती अपने भीतर इतिहास, आस्था और पौराणिक मान्यताओं की ऐसी कई कहानियां समेटे हुए है, जो आज भी लोगों की श्रद्धा का केंद्र बनी हुई हैं. झांसी के मऊरानीपुर क्षेत्र में स्थित प्राचीन केदारेश्वर मंदिर भी ऐसा ही एक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है. मान्यता है कि महाभारत काल यानी द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर पांडव पुत्र अर्जुन ने इसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की थी. यही वजह है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ एक प्राचीन शिवालय नहीं, बल्कि पौराणिक आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है.
द्वापरयुग से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
स्थानीय जनश्रुति के मुताबिक, द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर अर्जुन ने यहां भगवान शिव की आराधना के लिए शिवलिंग स्थापित किया था. मान्यता है कि तभी से यह स्थान भगवान शिव की उपासना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. अर्जुन और महाभारत काल से जुड़ी इस कथा के कारण मंदिर की धार्मिक महत्ता श्रद्धालुओं के बीच और बढ़ जाती है.
10वीं सदी में चंदेल राजाओं ने कराया निर्माण
केदारेश्वर मंदिर की पहचान पौराणिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है. मंदिर की स्थापत्य शैली इसे ऐतिहासिक रूप से भी बेहद खास बनाती है. मान्यता के अनुसार, दसवीं सदी में बुंदेलखंड पर शासन करने वाले चंदेल राजाओं ने इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया था. मंदिर की पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी आज भी चंदेलकालीन स्थापत्य कला की गवाही देती है.

मंदिर के प्रवेश द्वार और दीवारों पर पत्थरों को तराशकर की गई नक्काशी इसकी प्राचीन भव्यता को दर्शाती है. समय के थपेड़ों के बावजूद मंदिर की स्थापत्य विरासत आज भी श्रद्धालुओं और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को आकर्षित करती है.
सुबह कपाट खुलते ही पूजा के रहस्य की मान्यता
स्थानीय लोगों के बीच केदारेश्वर मंदिर को लेकर एक और रहस्यमयी मान्यता प्रचलित है. कहा जाता है कि सुबह जब मंदिर के कपाट खोले जाते हैं, तो ऐसा आभास होता है, मानो किसी अदृश्य शक्ति ने उससे पहले ही भगवान शिव की पूजा कर दी हो. यही मान्यता मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की जिज्ञासा और आस्था को और श्रद्धा को और गहरा किया है.
सावन में उमड़ता है आस्था का सैलाब
सावन का महीना आते ही केदारेश्वर मंदिर में भक्तों की भीड़ बढ़ने लगती है. दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु और कांवड़ यात्री यहां पहुंचते हैं. भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना करते हैं. सावन भर मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से भक्तिमय माहौल बना रहता है.

क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा के मुताबिक, केदारेश्वर मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था है. श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की ऐतिहासिकता को देखते हुए योगी सरकार ने यहां मूलभूत सुविधाओं का विकास कराया है. मंदिर तक पहुंचने के लिए संपर्क सड़क, बैठने की व्यवस्था, पेयजल और शेड जैसी सुविधाओं से श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत मिली है.



