बाहुबली विजय मिश्र की पत्नी को बड़ी राहत, HC से 10 साल की सजा सस्पेंड; जमानत पर रिहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक विजय मिश्र की पत्नी रामलली मिश्रा की 10 साल की सजा निलंबित कर उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. धोखाधड़ी मामले में निचली अदालत से दोषी करार रामलली को उनकी उम्र (70+) और लंबित अपील की लंबी प्रक्रिया के चलते यह राहत मिली है. मामले की सुनवाई में कोर्ट ने माना कि उनकी सजा तत्काल प्रभाव से निलंबित होने योग्य है.
उत्तर प्रदेश में भदोही से पूर्व विधायक और चर्चित बाहुबली नेता विजय मिश्र की पत्नी रामलली मिश्रा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट ने उनकी 10 साल की सजा को सस्पेंड कर दिया है. साथ ही उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं. उन्हें मिली यह राहत अपील पेंडिंग रहने तक प्रभावी रहेगी. इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजबीर सिंह की कोर्ट में हुई.
अदालत में रामलली पर लगे आरोप से संबंधित रिकॉर्ड, साक्ष्यों और अन्य परिस्थितियों पर जोरदार बहस हुई. इस दौरान अदालत ने माना कि रामलली की सजा तत्काल प्रभाव से निलंबित होने योग्य है. हालांकि अपने फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा कि इस आदेश को मामले के अंतिम गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की जा रही है. बता दें कि विजय मिश्रा की पत्नी रामलली मिश्रा निचली अदालत ने धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी.
हाईकोर्ट में दी चुनौती
निचली अदालत के इस फैसले को रामलली मिश्रा ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. साथ ही उन्होंने हाईकोर्ट से अपील की सुनवाई होने तक सजा सस्पेंड करने की मांग की थी. रामलली मिश्रा के वकील जीएस चतुर्वेदी ने अदालत में उनका पक्ष रखा. कहा कि एफआईआर में मुख्य आरोप सह-अभियुक्त विजय मिश्रा पर लगाए गए थे. जबकि रामलली मिश्रा के खिलाफ शिकायत में कोई स्पष्ट और विशिष्ट भूमिका तक नहीं बताई गई थी.
इस आधार पर मिली राहत
उन्होंने अदालत में रामलली का पक्ष रखते हुए कहा कि विवाद का मूल संबंध एक साझेदारी फर्म को लेकर है. इस विवाद का बड़ा हिस्सा दीवानी प्रकृति का है और इस संबंध में मध्यस्थता की कार्यवाही भी चल रही है. उन्होंने अदालत को बताया कि रामलली मिश्रा की उम्र 70 वर्ष से अधिक है. वह पूर्व में तीन महीने जेल में रह चुकी है. इसके अलावा उन्हें मुकदमे के ट्रॉयल के अग्रिम जमानत भी मिली थी. चूंकि हाईकोर्ट में अपीलों की पेंडेंसी ज्यादा है. इसलिए अंतिम सुनवाई में काफी समय लग सकता है. इसलिए उन्हें मामले के अंतिम निस्तारण तक सजा से मुक्त रखा जाना चाहिए.



